Main Menu

 

संस्थान ने अपने सामाजिक दायित्व को समझते हुए प्रारम्भ से ही कृषि उपकरण-विन्यास को अपने प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में स्थान दिया है। अत: अत्यधिक योजनाबद्घ ढंग से सुवाह्रय कृषि उपकरणों के विकास पर बल दिया गया। प्रारम्भिक विकास कार्यों में खेतों में प्रयुक्त किया जा सकने वाला पीएच मापी यंत्र सम्मिलित है, इसमें धातु से बने संवेदी प्रयोग में लाए गए थे, जो प्रयोगशाला में ही विकसित किए गए थे। इस दौर में संस्थान ने माइक्रोप्रोसैसर आधारित उपकरण विन्यास में उल्लेखनीय विशेषज्ञता विकसित की। माइक्रोप्रोसैसर आधारित मृदा विश्लेषक की परिकल्पना का प्रयोग कृषि क्षेत्र के अतिरिक्त रासायन उद्योग, औषधि निर्माण, अस्पतालों की प्रयोगशालाओं और विभिन्न तत्वों में विशिष्ट आयन सान्द्रता के मापन के लिए भी किया गया।
                                                         

 
इसके बाद सुवाह्रय पीएच मापी का किफायती संस्करण विकसित कर बड़ी संख्या में उनका निर्माण किया गया। कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में मृदा की गुणवत्ता का बहुत योगदान होता है। मृदा में आयन के स्तर का पता लगाने के लिए विशिष्‍ट एनालाइज़र बनाया गया, जो मृदा में आयन के स्तर का पता लगाकर यह निर्णय लेने में सहयोगी होता है कि खेतों में किस प्रकार की फसल उगाई जा सकती है। अच्छे कृषि उत्पादन में मृदा की लवणता की जानकारी भी महत्त्वपूर्ण होती है। क्योंकि ज़मीन में लवणता अधिक होने से फसल का स्तर गिर जाता है। कृषि के इस पक्ष में सहयोग प्रदान करने के लिए डिजिटल इलैक्ट्रोमैग्नेटिक सॉयल सैलिनिटी टैस्टर विकसित किया गया। इस उपकरण का विकास कर विभिन्न स्थानों पर इसके सफल परीक्षण किए गए। आगामी चरण में विभिन्न कृषि परिमापकों के मापन के लिए अनेक नवीन विधियों, तकनीकों एवं सिद्घांतों को आधार बनाकर विकास एवं परिकल्पनना का कार्य किया गया। इस चरण पर किए गए उल्लेखनीय कार्यों में बॉंस की गॉंठों को हटाने एवं काटने के लिए मशीन का विकास, कपास के बीजों में विषैले पदार्थ गॉसिपोल के निर्धारण के लिए गॉसिपोल मापन प्रणाली, आयोडिन मापी एवं एफ्रलाटॉक्सिन मापी शामिल हैं।

 

अन्न की गुणवत्‍ता मॉनिटरिंग पर भी उस समय ध्यान केन्द्रित किया गया और परिणामस्वरूप मल्टी ग्रेन मॉयस्चर मीटर तैयार हुआ। संस्था के सुपरा इंस्टिट्रयूशनल प्रोजेक्ट के अन्तर्गत ''सामाजिक अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकी समाधान' शीर्षक परियोजना प्रारम्भ की गई। इसका उद्देश्य कृषि उपकरणविन्यास के विभिन्न पहलुओं यथा संवेदियों व उपकरणों और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता के मात्रमापन पर ध्यान केन्द्रित करना था। इसके अन्तर्गत मृदा की संरचना जानने के लिए उपकरण बनाए गए, जिन्हें सरलता से ट्रैक्टर के साथ जोड़कर प्रयुक्त किया जा सकता है। मृदा में कीटनाशकों की मात्रा का आकलन करने के लिए संवेदकों के विकास का कार्य भी इस अनुसंधान क्षेत्र में किया गया। संगठन ने चावल, चाय और शहद की गुणवत्ता मापन के लिए भी उपकरणों का विकास किया है। आलू और सेब की फसल के बिना क्षय के लम्बे समय तक भंडारण की नई तकनीक भी विकसित की गई।
  

भविष्य की योजनाओं में संस्थान की कृषि उत्पादन के संरक्षण तथा कृषि उत्पादकता को बढ़ाने की दिशा में कुछ उपकरणों के विकास की योजना है जिनमें खाद्यान्नों एवं बीजों के संरक्षण के उपाय सम्मिलित हैं|

 
 

खोज