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पर्यावरण उपकरण विन्यास
 
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास कार्य करते हुए इससे सामान्य जन के जीवन स्तर को बेहतर बनाना सीएसआइओ का सदैव उद्देश्य रहा है| पर्यावरण के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के उपकरणों का विकास भी उसी दिशा में उठाया गया एक कदम था| संगठन के पर्यावरण उपकरणविन्यास विभाग ने धूम्र, धूलकण एवं जल की गुणवत्ता जैसे परिमापकों के मापन के लिए विभिन्न प्रणालियों का विकास किया| स्मोक डेन्सिटी मॉनिटर, ऑटोमोबाइल एग्सॉस्ट स्मोक ओपेसिटी  मॉनिटर, डस्ट मॉनिटर विकसित किए गए इसी श्रेणी के कुछ उपकरण हैं| इसके उपरांत कम वोल्टता का इलैक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर विकसित किया गया जिसके द्वारा टैलिफोन एक्स्चेंज, गहन चिकित्सा कक्षों आदि में धूल कणों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकता था| इसी क्रम में जल की गुणवत्ता एवं प्रदूषण के स्तर के मापन के लिए डिजिटल टर्बिडिटी मीटर का विकास किया गया| वायु एवं जल प्रदूषकों के मापन के लिए साधारण रासायनिक तकनीकों के विकास के लिए इस विभाग द्वारा एक रासायनिक प्रयोगशाला की भी स्थापना की गई
 

 

सीवरेज उपचार के लिए डिस्इन्फैक्टेन्ट यूनिट का विकास इस क्षेत्र का  महत्‍वपूर्ण मील पत्थर था| यह कार्य पर्यावरण मंत्रलय के प्रदूषण नियंत्रण अनुसंधान संस्थान के सहयोग किया गया और प्रायोगिक संयंत्र हरिद्वार के जगजीतपुर सीवरेज वाटर ट्रीटमैंट प्लांट पर लगाया गया| कपड़ा मिलों, सीमेंट संयंत्रों, खदानों आदि में वातावरण में धूल कणों के निरन्तर मापन के लिए विभाग ने नीफेलोमीटर का विकास भी किया| प्रतिदिन तापमान, वातावरणीय दाब, वायु की गति एवं दिशा के मापन के लिए विभाग ने एक मेट्रोलॉजिकल स्टेशन की स्थापना की जिससे प्राप्त ऑंकड़ों का प्रयोग मौसम संबंधी परिमापकों के वातावरण में प्रदूषकों की सघनता पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए किया गया| खदानों में मीथेन गैस का पता लगाने के लिए मीथेन गैस इन्टरफैरोमीटर का प्रयोगशाला प्रोटोटाइप पर्यावरण उपकरणविन्यास प्रभाग की एक अन्य उपलब्धि रही है|

 

 

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