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इंजीनियरिंग शिक्षण 

 

जहॉं इण्डो-स्विस प्रशिक्षण केन्द्र में डिप्लोमा स्तर के प्रशिक्षण का कार्य दशकों से जारी है, वहीं संगठन में इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करने का कार्य भी अब नियमित रूप से किया जा रहा है। उत्तर भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना हो जाने से यह कार्य एक सामाजिक दायित्व बन गया है। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले जूनियर रीसर्च फैलो की संख्या में भी लगातार वृद्घि हो रही है। बंगाल इंजीनियरिंग साइंस यूनिवर्सिटी (बेसू), शिबपुर, कोलकाता के साथ हुए समझौता ज्ञापन, जिसमें सीएमईआरआइ, दुर्गापुर और सीरी, पिलानी भी शामिल हैं, के अनुसार एम.टैक के दो बैच अब तक संगठन में कोर्स अध्ययन के लिए आ चुके हैं।

संगठन में शैक्षिक गतिविधियों के लिए बहुत अनुकूल वातावरण बन रहा है। संगठन सीएसआइआर के मानव संसाधन समूह और अन्य राष्ट्रीय अनुसंधान परिषदों द्वारा निदेशित एवं समर्थित सभी शैक्षणिक एवं अनुसंधान फैलोशिप क्रियाकलापों में भाग लेने के लिए दृढ़संकल्प है। इन योजनाओं के अन्तर्गत फैलोशिप एवं असिस्टैंटशिप प्रदान की जाती है जिसके लिए आवेदन सीएसआइओ के माध्यम से भेजे जाते हैं।

इसके अतिरिक्त आइएसटीसी द्वारा विदेश मामलों के मंत्रलय द्वारा प्रायोजित आइटैक/स्कैप कार्यक्रम के अन्‍तर्गत विकासशील देशों के प्रतिभागियों के लिए जैव चिकित्सा, ऑप्टिकल एवं विश्लेषणात्मक उपकरणों आदि के प्रचालन एवं रख-रखाव पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

 

सीएसआइआर-पीजीआरपीई 

 

इस क्षेत्र में सीएसआइआर के महानिदेशक प्रो. समीर के ब्रह्रमचारी की वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान की अपनी अकादमी की स्थापना के सपने को साकार रूप देते हुए 'पोस्ट ग्रेजुएट रीसर्च प्रोग्राम इन इंजीनियरिंग' के नाम से वर्ष 2009 में एम.टेक. स्तर का कार्यक्रम सीएसआइआर की कुछ चुनींदा प्रयोगशालाओं में प्रारम्भ किया गया। प्रथम चरण में चुनी गई प्रयोगशालाओं में सीएसआइओ को भी शामिल किया गया और संस्थान एग्रिऑनिक्‍स, बायो-मेडिकल इंजीनियरिंग एवं ऑप्टिक्स एवं फोटोनिक्स के क्षेत्र में एडवांस्ड इन्स्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग कोर्स चला रहा है।

देश में प्रतिवर्ष लगभग 6,50,000 बीई/बीटैक तैयार होते हैं, उनमें से लगभग 10% उच्चतर शिक्षा में जाते हैं। सीएसआइआर का लक्ष्य करीब 10% विद्यार्थियों को अनुसंधान की ओर आकृष्ट करना है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत उम्मीदवारों का चयन क्विक हायर स्कीम में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. समीर के बह्रमचारी, महानिदेशक, सीएसआइआर ने 08 सितम्बर, 2009 को दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीएसआइआर के इस कार्यक्रम को प्रारम्भ करने वाली सभी सात प्रयोगशालाओं में एक साथ किया।

 


 

पीजीआरपीई कोर्स पूर्णतया आवासीय कोर्स है, व्यावसायिक अपग्रेडेशन के उद्देश्य से अन्य स्थानों का दौरा करने के लिए इन प्रशिक्षुओं को अतिथि गृह एवं परिवहन सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। इस कार्यक्रम के प्रथम बैच के सभी नौ प्रशिक्षु अपना कोर्स पूरा कर संगठन में वैज्ञानिक पद पर कार्यरत्त हैं। कुल 20 विद्यार्थियों के दो बैच अभी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। और संगठन चौथे बैच की प्रवेश प्रक्रिया के लिए तैयार है।  

3 अप्रैल, 2012 एसीएसआइआर के लिए एक एतिहासिक दिन था, जिसके बाद इसे भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर दिया गया। इसके साथ ही अकादमी में पॉच वर्षीय सुगठित कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में पीएच. डी पर सम्पन्न होता है। इसकी विशिष्टता यह है कि यह उच्च विज्ञान के माध्यम से विविध विषयों के अध्ययन का अवसर प्रदान करता है। वर्तमान में लगभग 100 युवा विभिन्न कार्यक्रमों के अन्तर्गत शिक्षण प्राप्त कर कर रहे हैं।

 

 

 

 

 

 

 

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